आखिर क्यों डरते हैं लोग अधिक मास में बड़े फैसले लेने से? क्या यह वाकई अशुभ है?
क्या आपके जीवन में बार-बार प्रयास करने के बाद भी रुकावटें आ रही हैं? क्या नई नौकरी मिलने के बाद भी मन अशांत रहता है? क्या आपकी बड़ी-बड़ी बिजनेस डील अंतिम समय पर आकर अटक जाती हैं? या फिर शादी की बात पक्की होने के बाद भी अचानक टूट जाती है?
अक्सर जब जीवन में ऐसा भटकाव आता है, तो हम पंचांग और ग्रहों की स्थिति को देखते हैं। साल 2026 में एक ऐसा ही समय आ रहा है जिसे लेकर समाज में ढेरों भ्रांतियां और गहरा डर है—वह है अधिक मास 2026 (Adhik Maas 2026)। बहुत से लोग सोचते हैं कि अधिक मास अशुभ होता है और इस दौरान कोई भी नया काम शुरू करने से सर्वनाश हो जाता है। लेकिन क्या वैदिक ज्योतिष और सनातन परंपरा वाकई इसे अशुभ मानती है?
सच इसके बिल्कुल विपरीत है! वैदिक विज्ञान के अनुसार, यह महीना अशुभ नहीं बल्कि “आध्यात्मिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली और ऊर्जावान” माना जाता है। यह कालखंड भौतिक इच्छाओं की अंधी दौड़ से ब्रेक लेकर आत्मशुद्धि, कर्म सुधार, मानसिक शांति और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने का एक दिव्य ‘कॉस्मिक रीसेट’ है। यदि आप भी भ्रमित हैं कि इस दौरान क्या करें और क्या न करें, तो भारत के जाने-माने ज्योतिषीय संस्थान astrodrmunishsharma के इस विशेष लेख में आपको अपने सभी सवालों के तार्किक और प्रामाणिक जवाब मिलेंगे।
- अधिक मास 2026 क्या है? (Purushottam Maas Significance)
सनातन धर्म के पंचांग में अधिक मास (Adhik Maas) को एक खगोलीय चमत्कार और आध्यात्मिक उपहार माना गया है। इसे लोकभाषा में ‘मलमास’ या ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर सूर्य वर्ष (Solar Year) और चंद्र वर्ष (Lunar Year) के चक्र पर आधारित होता है।
खगोलीय गणना: एक सूर्य वर्ष लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है। इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है।
संतुलन का नियम: इस 11 दिनों के अंतर को पाटने और सौर व चंद्र कैलेंडर में तालमेल बिठाने के लिए हर 32 महीने, 16 दिन और 4 घड़ियों के बाद पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी गणितीय और वैदिक संतुलन को हम ‘अधिक मास’ कहते हैं। साल 2026 में यह विशेष योग बन रहा है।
पौराणिक कथा और ‘पुरुषोत्तम मास’ नाम कैसे पड़ा?
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने की उत्पत्ति हुई, तो इसमें सूर्य संक्रांति (सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) न होने के कारण इसे “मलमास” कहकर दूषित मान लिया गया। कोई भी देवता इस महीने का स्वामी बनने को तैयार नहीं था। दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया।
करुणासागर भगवान नारायण ने इस महीने के कष्ट को समझा और इसे अपना सबसे प्रिय नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया। भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि जो भी मनुष्य इस महीने में मेरी भक्ति, Spiritual cleansing rituals, मंत्र जाप और दान-पुण्य करेगा, उसे अन्य महीनों की तुलना में करोड़ों गुना अधिक फल प्राप्त होगा। इसलिए, अधिक मास क्या है का सीधा उत्तर है—यह साक्षात श्रीहरि की कृपा का साक्षात् द्वार है।
- क्या अधिक मास में नई नौकरी जॉइन कर सकते हैं? (Career Astrology Guidance Online)
यह आधुनिक युवाओं और कामकाजी पेशेवरों द्वारा पूछा जाने वाला सबसे बड़ा और व्यावहारिक सवाल है। जब करियर में नए अवसर आते हैं, तो कंपनियां अधिक मास खत्म होने का इंतजार नहीं करतीं। ऐसे में ज्योतिषीय दृष्टिकोण क्या कहता है?
ज्योतिषीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यदि आपको अपनी मेहनत से कोई नई नौकरी का ऑफर मिला है, तो उसे ठुकराना समझदारी नहीं है। नई नौकरी जॉइन करना पूरी तरह से निषिद्ध नहीं है। हालांकि, यदि आपके पास ज्वॉइनिंग डेट को आगे बढ़ाने का विकल्प मौजूद हो, तो अधिक मास समाप्त होने के बाद शुरुआत करना सबसे सर्वोत्तम और दीर्घकालिक सफलता देने वाला माना जाता है।
किन परिस्थितियों में नौकरी तुरंत जॉइन कर लेनी चाहिए?
यदि आप निम्नलिखित स्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो बिना किसी संकोच के कदम आगे बढ़ाएं:
आर्थिक दबाव: यदि आप लंबे समय से बेरोजगार हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
अभूतपूर्व अवसर: यदि यह आपके सपनों की कंपनी या आपके करियर का सबसे बड़ा ब्रेक है।
विदेश में नौकरी: यदि आपको इंटरनेशनल करियर सेटलमेंट या Foreign Settlement का मौका मिल रहा है।
सरकारी नौकरी: यदि सरकार द्वारा ज्वाइनिंग की तारीख तय की गई है, जहाँ बदलाव संभव नहीं है।
Astro Guidance by astrodrmunishsharma
यदि अपरिहार्य कारणों से आपको अधिक मास के दौरान ही नई नौकरी की शुरुआत करनी पड़ रही है, तो डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। ज्वाइनिंग के पहले दिन सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सम्मुख घी का दीपक जलाएं। पीले रंग के वस्त्र या कम से कम एक पीला रुमाल अपने पास रखें। ज्वाइनिंग की औपचारिकताएं पूरी करने से पहले मन ही मन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार मानसिक जाप करें। यह उपाय कार्यस्थल की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर आपके करियर को स्थिरता प्रदान करता है।
- क्या अधिक मास में बिजनेस डील साइन कर सकते हैं? (Business Growth Astrology Remedies)
व्यापार जगत में समय ही सब कुछ है, लेकिन अधिक मास के दौरान नए व्यापारिक उपक्रमों को लेकर शास्त्रों में विशेष नियम बताए गए हैं।
नया व्यापार और भारी निवेश क्यों टालें?
अधिक मास के दौरान नया बिजनेस शुरू करना, नई पार्टनरशिप डीड साइन करना, नई कंपनी लॉन्च करना या शेयर बाजार व प्रॉपर्टी में बहुत बड़ा और जोखिम भरा निवेश (Aggressive Expansion) करने से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, इस महीने में ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं आंतरिक विकास और चिंतन की ओर झुकी होती हैं। इस समय भौतिक या व्यावसायिक आक्रामकता के कारण फैसले गलत हो सकते हैं, जिससे भविष्य में भारी आर्थिक मंदी या घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
तो व्यापारी इस दौरान क्या करें?
यदि आप अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं, तो इस समय को ‘प्लानिंग फेज़’ की तरह इस्तेमाल करें:
समीक्षा और ऑडिट: अपने पुराने बिजनेस मॉडल, वित्तीय गलतियों और पिछले निवेशों की गहराई से समीक्षा करें।
रणनीति का निर्माण: आने वाले समय के लिए मजबूत बिजनेस स्ट्रेटेजी और मार्केटिंग प्लान तैयार करें।
कर्मचारियों का कल्याण: अपने स्टाफ और कर्मियों के साथ संबंध सुधारें, उन्हें बोनस या उपहार दें। ज्योतिष में कर्मचारियों को शनि का रूप माना जाता है, उन्हें खुश रखने से व्यापार स्वतः बढ़ता है।
दुकान या ऑफिस का शुद्धिकरण: नियमित रूप से अपनी व्यावसायिक स्थापना में गंगाजल छिड़कें और कपूर जलाएं।
यदि कोई बहुत ही महत्वपूर्ण और समय-सीमा वाली बिजनेस डील आ जाए, तो आप astrodrmunishsharma की Online astrology consultation India सेवा के माध्यम से अपनी कुंडली के अनुसार तात्कालिक शुभ मुहूर्त निकलवाकर डील फाइनल कर सकते हैं।
- क्या शादी, गृह प्रवेश और मुंडन करना चाहिए? (Marriage Problem Astrology Solution)
सनातन परंपरा में 16 संस्कारों का बहुत महत्व है। लेकिन अधिक मास के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ संस्कारों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है।
वर्जित कार्य,आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारण
विवाह (Marriage),”विवाह केवल दो शरीरों का नहीं, बल्कि दो आत्माओं और भाग्य का मिलन है। अधिक मास में शुक्र और गुरु की सांसारिक ऊर्जाएं शिथिल रहती हैं, जिससे इस समय किया गया विवाह दांपत्य जीवन में अनबन, वैचारिक मतभेद या अलगाव का कारण बन सकता है।”
गृह प्रवेश (Griha Pravesh),”नया घर भौतिक सुख और ऐश्वर्य का प्रतीक है। चूंकि यह महीना भौतिक विलासिता के लिए नहीं है, इसलिए इस दौरान नए घर में प्रवेश करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कम हो सकता है और वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं।”
मुंडन और सगाई,”बच्चों का मुंडन संस्कार या सगाई जैसे मांगलिक उत्सव बाहरी और सामाजिक होते हैं, जबकि यह समय एकांत और ईश्वर भक्ति का है।”
इसका मूल आध्यात्मिक कारण क्या है?
अधिक मास का सीधा संबंध संसार को चलाने वाले भगवान विष्णु से है। यह समय सांसारिक उत्सवों, दिखावे, बैंड-बाजे और पार्टियों का नहीं है। यह समय अपनी आत्मा के शुद्धिकरण का है। इसलिए इन भौतिक कार्यों को टालकर ईश्वर केंद्रित होना ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि विवाह में पहले से ही देरी हो रही है, तो इस महीने में किए गए विशेष Vedic fasting benefits और उपाय Marriage problem astrology solution का काम करते हैं।
- अधिक मास में क्या करना चाहिए? (Spiritual Cleansing Rituals)
यह महीना आपके जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता को मिटाकर सुख, समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त करने का स्वर्ण काल है। इस दौरान निम्नलिखित आध्यात्मिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं: - भगवान विष्णु की विशेष पूजा (Vishnu Puja for Money and Peace)
चूंकि यह पुरुषोत्तम मास है, इसलिए श्रीहरि की आराधना सर्वोत्तम फल देती है।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ: प्रतिदिन सुबह या शाम को विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण करने से घर का क्लेश दूर होता है और आर्थिक तंगी समाप्त होती है।
भगवद गीता का पाठ: गीता के चौदहवें अध्याय का पाठ इस महीने में अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
तुलसी अर्चना: तुलसी जी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। रोज शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और उनकी परिक्रमा करें।
दीपदान: किसी पवित्र नदी, मंदिर या घर के मुख्य द्वार पर दीपदान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है।
- महामंत्रों का जाप
मंत्रों में अद्भुत कंपन (Vibrations) होते हैं जो हमारे आभा मंडल (Aura) को शुद्ध करते हैं। अधिक मास में इस महामंत्र का जाप कम से कम 3 माला रोज करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यदि जीवन में अत्यधिक शत्रु बाधा या अज्ञात भय हो, तो आप महामृत्युंजय मंत्र या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
- दान-पुण्य का महात्म्य (Vedic Fasting & Charity)
अधिक मास में किए गए दान का फल कभी समाप्त नहीं होता। इस महीने में पीले रंग की वस्तुओं के दान का विशेष महत्व है:
अन्न और वस्त्र दान: भूखे लोगों को सात्विक भोजन कराएं और जरूरतमंदों को पीले वस्त्र दान करें।
सामग्री दान: चना दाल, हल्दी, गाय का शुद्ध घी, तांबे के बर्तन और धार्मिक पुस्तकों का दान आपकी कुंडली के गुरु ग्रह को मजबूत करता है।
Spiritual Tip by astrodrmunishsharma
यदि आपके घर में लगातार धन की हानि हो रही है, बरकत नहीं रुक रही या कर्ज बढ़ता जा रहा है, तो अधिक मास के प्रत्येक गुरुवार को किसी प्राचीन विष्णु या लक्ष्मी-नारायण मंदिर में जाएं। वहां भगवान के चरणों में शुद्ध केसर और पीले रंग की मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू या पेड़े) अर्पित करें। इसके बाद मंदिर के प्रांगण में बैठकर कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। यह उपाय आपकी आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार लाता है।
- अधिक मास में क्या भूलकर भी न करें? (नकारात्मक ऊर्जा से बचाव)
यदि आप अधिक मास के शुभ फलों को प्राप्त करना चाहते हैं, तो अपनी जीवनशैली से इन आदतों और चीजों को तुरंत बाहर कर दें:
तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग: इस पूरे महीने मांसाहार, शराब, नशीले पदार्थ, लहसुन, प्याज और बासी भोजन से सख्त परहेज करें। तामसिक भोजन हमारी बुद्धि को भ्रमित करता है और आध्यात्मिक ऊर्जा को नष्ट करता है।
क्रोध और कटु वाणी पर नियंत्रण: किसी का अपमान करना, झूठ बोलना, धोखा देना या पीठ पीछे निंदा करना इस महीने में सबसे बड़ा पाप माना गया है। आपकी कटु वाणी आपके पुण्यों को क्षीण कर देती है।
अनावश्यक और फिजूलखर्ची: यह महीना संयम और सादगी का प्रतीक है। दिखावे के लिए महंगी वस्तुएं खरीदना, विलासिता पर पैसे उड़ाना आध्यात्मिक अनुशासन के खिलाफ है।
ब्रह्मचर्य का पालन: इस पवित्र समय में शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य माना गया है।
- अधिक मास और ग्रहों का गहरा संबंध (Karma Healing Astrology)
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, अधिक मास का सीधा संबंध ब्रहस्पति (Guru Graha) और आपकी कुंडली के नवग्रहों के संतुलन से है। जिन लोगों की कुंडली में निम्नलिखित दोष या समस्याएं हैं, उनके लिए यह महीना एक वरदान की तरह है:
पितृ दोष और कालसर्प दोष: अधिक मास में नारायण की पूजा करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष का प्रभाव न्यूनतम हो जाता है।
कमजोर गुरु (Weak Jupiter): यदि आपकी कुंडली में देवगुरु बृहस्पति कमजोर स्थिति में हैं, जिसके कारण शिक्षा, करियर या संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, तो इस महीने पीले अनाज का दान आपके भाग्य को बदल सकता है।
राहु-केतु का दुष्प्रभाव: यदि जीवन में अचानक दुर्घटनाएं या मानसिक तनाव बढ़ गया है, तो Spiritual cleansing rituals और विष्णु आराधना से राहु-केतु शांत होते हैं।
यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार सटीक और कस्टमाइज्ड उपाय जानना चाहते हैं, तो Best astrologer in Delhi NCR के रूप में प्रसिद्ध astrodrmunishsharma से संपर्क कर अपनी शंकाओं का समाधान पा सकते हैं।
Faq
प्रश्न 1: अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर: अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया बिजनेस शुरू करना, प्रॉपर्टी या बड़ा वित्तीय निवेश, तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन और कटु वाणी का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 2: अधिक मास किस भगवान को समर्पित है?
उत्तर: अधिक मास पूर्ण रूप से भगवान विष्णु (श्रीहरि नारायण) को समर्पित है। भगवान विष्णु ने स्वयं इस महीने को अपना नाम देकर इसे “पुरुषोत्तम मास” बनाया है।
प्रश्न 3: क्या अधिक मास में नौकरी जॉइन कर सकते हैं?
उत्तर: जी हां, यदि परिस्थितियां बहुत जरूरी हों (जैसे आर्थिक संकट या सरकारी नौकरी), तो भगवान विष्णु का ध्यान करके और पीले वस्त्र धारण करके नौकरी जॉइन की जा सकती है। हालांकि, स्वेच्छा से नई शुरुआत के लिए इसे टालना बेहतर होता है।
प्रश्न 4: क्या अधिक मास अशुभ होता है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। अधिक मास बेहद शुभ और उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा वाला महीना है। केवल भौतिक और सांसारिक कार्यों की जगह इसमें आध्यात्मिक कार्यों को वरीयता दी जाती है।
आधुनिक जीवन में अधिक मास की प्रासंगिकता (Modern Life Connection)
आज की भागदौड़ भरी, कॉर्पोरेट और तनावपूर्ण जिंदगी में जहां हर व्यक्ति डिप्रेशन, ओवरथिंकिंग, आर्थिक असुरक्षा और बिखरते रिश्तों से परेशान है, वहां अधिक मास एक संजीवनी बूटी की तरह काम करता है। यह महीना हमें सिखाता है कि जीवन में कुछ समय के लिए ‘Slow Down’ होना कितना जरूरी है। जब हम अपनी व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा समय निकालकर ईश्वर, ध्यान और सात्विक जीवन से जुड़ते हैं, तो हमारा मानसिक तनाव स्वतः ही समाप्त हो जाता है।
समस्या (Problem): आज हर दूसरा व्यक्ति करियर में रुकावट, व्यापार में मंदी, लगातार होते धन घाटे और विवाह में आ रही देरी से मानसिक रूप से टूट चुका है।
व्याकुलता (Agitation): कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी परिणाम शून्य आते हैं क्योंकि हम अनजाने में गलत समय पर बड़े फैसले ले लेते हैं या हमारी कुंडली के ग्रह हमारे विपरीत चल रहे होते हैं।
समाधान (Solution): अधिक मास 2026 आपकी इन सभी समस्याओं को जड़ से खत्म करने का एक दैवीय अवसर है। इस महीने में सही नियमों का पालन, सात्विक जीवन, दान-पुण्य और प्रामाणिक ज्योतिषीय उपाय आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल सकते हैं।
यदि आप लंबे समय से अपनी व्यक्तिगत, व्यावसायिक या वैवाहिक समस्याओं से जूझ रहे हैं और आपको कोई रास्ता नहीं मिल रहा है, तो एक सही और अनुभवी वैदिक मार्गदर्शन आपके जीवन में उजियारा ला सकता है। astrodrmunishsharma द्वारा सुझाए गए बेहद सरल, वैज्ञानिक और सटीक आध्यात्मिक उपाय देश-विदेश के हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक स्थिरता, मानसिक शांति और अभूतपूर्व ग्रोथ लेकर आए हैं।
अंतिम आध्यात्मिक संदेश (Final Spiritual Message)
अधिक मास केवल कैलेंडर का एक अतिरिक्त पन्ना या तारीखों का फेरबदल नहीं है। यह साक्षात परमेश्वर द्वारा मानव जाति को दिया गया एक “आध्यात्मिक रीसेट बटन” (Spiritual Reset) है। यह पवित्र समय हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन केवल पैसा कमाने, गाड़ियां खरीदने या भौतिक सुखों को इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है। आत्मा की असली संतुष्टि मानसिक शांति, अच्छे कर्मों (Karma Healing), नि:स्वार्थ दान और ईश्वर के प्रति समर्पण से ही मिलती है।
इस पुरुषोत्तम मास में पूरी श्रद्धा के साथ खुद को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें, अपनी बुरी आदतों का त्याग करें और सात्विक जीवन अपनाएं। श्रीहरि नारायण आपके जीवन के सभी संकटों को हरकर आपको सुख, समृद्धि, दीर्घायु और अटूट मानसिक शांति प्रदान करेंगे।
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