यशोदा जयंती 2026 भारतीय संस्कृति में मातृत्व के सर्वोच्च स्वरूप का उत्सव है। माता यशोदा केवल भगवान श्रीकृष्ण की पालक माता नहीं थीं, बल्कि वे निःस्वार्थ प्रेम, वात्सल्य और संस्कारों की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि माँ बनना केवल जन्म देने से नहीं, बल्कि पालन, संरक्षण और प्रेम देने से पूर्ण होता है।

“माँ वह है, जो प्रेम से भगवान को भी बाँध ले।”
यशोदा जयंती 2026 कब है?
यशोदा जयंती 2026 भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इसी दिन माता यशोदा का जन्म हुआ था। यह तिथि विशेष रूप से संतान सुख, मातृत्व सौभाग्य और पारिवारिक शांति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
माता यशोदा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
माता यशोदा वात्सल्य रस की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। धार्मिक ग्रंथों में उनका प्रेम इतना गहन बताया गया है कि उन्होंने अपने प्रेम से भगवान श्रीकृष्ण को भी रस्सी से बाँध लिया — जिसे दामोदर लीला कहा जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से माता यशोदा का संबंध मुख्यतः:
चंद्रमा → मातृत्व, भावनात्मक सुरक्षा
बृहस्पति (गुरु) → संस्कार, पालन-पोषण, धर्म
चतुर्थ भाव → गृह सुख और पारिवारिक स्थिरता
इसी कारण यशोदा जयंती गृह क्लेश शांति, संतान संबंधी समस्याओं और मानसिक संतुलन से जुड़ी मानी जाती है।
यशोदा जयंती 2026 पर क्या करें? (पूजा, व्रत और उपाय)
इस दिन किए गए सरल उपाय विशेष फल प्रदान करते हैं:
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- माता यशोदा और बाल गोपाल की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
- दूध, माखन, मिश्री और फल अर्पित करें
ज्योतिषीय उपाय
- संतान सुख के लिए चंद्र शांति प्रार्थना
- बच्चों के स्वास्थ्य हेतु गुरु मंत्र जप
- गृह कलह शांति हेतु दीपदान
इन उपायों को पारंपरिक रूप से कई ज्योतिषाचार्य, जैसे astrodrmunishsharma, अत्यंत प्रभावी मानते हैं।
यशोदा जयंती और संतान संबंध
माता यशोदा का जीवन यह सिखाता है कि संतान को केवल अनुशासन नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और स्नेह की भी आवश्यकता होती है। यशोदा जयंती 2026 विशेष रूप से उन माता-पिता के लिए शुभ है जो:
- बच्चों के व्यवहार को लेकर चिंतित हैं
- संतान के स्वास्थ्य या शिक्षा में बाधा महसूस कर रहे हैं
- परिवार में भावनात्मक दूरी अनुभव कर रहे हैं
“संस्कार वही हैं, जो प्रेम से दिए जाएँ।”
आधुनिक जीवन में माता यशोदा की सीख
- आज की तेज़-रफ़्तार दुनिया में माता यशोदा हमें सिखाती हैं:
- बच्चों के साथ समय बिताना सबसे बड़ा उपहार है
- प्रेम से दिया गया अनुशासन स्थायी प्रभाव डालता है
- परिवार की नींव भावनात्मक सुरक्षा से बनती है
यशोदा जयंती केवल पूजा नहीं, बल्कि मातृत्व चेतना को जागृत करने का दिन है।
अंतिम संदेश
यशोदा जयंती 2026 हमें याद दिलाती है कि प्रेम और धैर्य से असंभव भी संभव हो जाता है। यदि आप संतान सुख, पारिवारिक शांति या मानसिक संतुलन के लिए ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाहते हैं, तो कुंडली विश्लेषण सहायक हो सकता है।
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